Friday, February 9, 2018

Bhagwati strotram

जय भगवति देवि नमो वरदे, जयपापविनाशिनी बहुफलदे।
जयशुम्भनिशुम्भकपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे।।1।।
जयचन्द्रदिवाकरनेत्रधरे, जय पावकभूषितवक्त्रवरे।
जय भैरवदेहनिलीनपरे,जय अन्धकदैत्यविशोषकरे।।2।।
जय महिषविमर्दिनी शूलकरे,जय लोकसमस्तकपापहरे।
जयदेवि पितामहविष्णुनते,जय भास्करशक्रशिरोवनते।।3।।
जय षण्मुखसायुधईशनुते,जय सागरगामिनि शम्भुनुते।
जय दुःखदरिद्रविनाशकरे,जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे।।4।।
जय देवि समस्तशरीरधरे,जय नाकविदर्शिनी दुख हरे।
जय व्याधिविनाशिनी मोक्षकरे,जय वांछितदायिनी सिद्धिवरे।।5।।
एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं यः पठेन्नियतःशुचिः।
गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा।।6।।

Wednesday, February 7, 2018

अपेक्षाएं

अपेक्षाएं अलगअलग व्यक्ति में अलगअलग देखने को मिलती हैं. जैसे मातापिता की बच्चों से, बच्चों की मातापिता से, दोस्तों की दोस्तों से रिश्तेदारों की रिश्तेदारों से और सहकर्मियों की सहकर्मियों से. यानी अपेक्षाएं अनंत हैं. इस बात को ऐसे भी कहा जा सकता है कि समाज में हर व्यक्ति की दूसरे व्यक्ति से अपेक्षा रहती है, लेकिन इस में यह भी होता है कि वह आमतौर पर सामने वाले व्यक्ति से अपनी सोच के अनुसार व्यवहार की अपेक्षा रखता है. लेकिन सामने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति की सोच के अनुसार व्यवहार करे, ऐसा अकसर होता नहीं. इसलिए हर व्यक्ति की अपेक्षा पूरी हो यह संभव नहीं. हर व्यक्ति के मन में रोज एक नई अपेक्षा जन्म लेती है. पर उस का वास्तविकता से कितना संबंध होता है यह कहा नहीं जा सकता. फिर भी अपेक्षा किसी भी रिश्ते की पहली सीढ़ी है.i

Sunday, July 10, 2016

सनातन धर्म

“ यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें। ”
—ऋग्वेद-3-18-1धर्म

Saturday, March 5, 2016

kalitandav Stuti

ाली तांडव स्तुति :-
नमो देवि अनन्तरूपिणी प्रणत पलिनी माँ ।। १ ।।
जय कालि विकरालिनी नृकपालिनी करमालिनी ।
निखिलस्वामिनी कालकामिनी भामिनि शशिभालिनी ।।२ ।।

महाघोरा पद्विभोरा रुद्रतारा दनुजदलिनी ।
मुक्तकेशिनी तपोवेशिनी अट्टहासिनी मुण्डमालिनी ।।३ ।।
गिरिशगेहिनी विश्वगेहिनी भुवनमोहिनी त्रिगुणशालिनी ।
मङ्गले कलिमूलनाशिनी दितिजकलुषप्रक्षालिनी ।।४ ।।

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