
जन्मदिनों का निर्धारण जन्म के समय की ग्रह स्थिति और महीने के अनुसार किया जाता है। प्लैनेटैरियम नाम के सॉफ्टवेयर ने शोधकर्ताओं को राम के वास्तविक जन्म दिन का पता लगाने में मदद की है। यह तिथि है 5114 बी.सी. में 10 जनवरी। राम का राजतिलक 5089 बी.सी. में 5 जनवरी को निश्चित किया गया था। वे वनवास के लिए 1 दिन पहले चले गये। उस समय वे 25 वर्ष के थे। राम-रावण युद्ध 5076 बी.सी. में।अगस्त्यसंहिताके अनुसार चैत्र शुक्ल नवमीके दिन पुनर्वसु नक्षत्र, कर्कलग्नकमें जब सूर्य अन्यान्य पाँच ग्रहोंकी शुभ दृष्टिके साथ मेषराशिपर विराजमान थे, तभी साक्षात् भगवान् श्रीरामका माता कौसल्याके गर्भसे जन्म हुआ।दिन के बारह बजे जैसे ही शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए हुए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हुए तो मानो माता कौशल्या उन्हें देखकर विस्मित हो गईं।
प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम्।
कौसल्याजनयद् रामं दिव्यलक्षणसंयुतम्॥( श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण, प्रथम खण्ड, अष्टादशः सर्गः श्लोक 10 का अंश)
अर्थात् कौसल्या ने दिव्य लक्षणों से युक्त, सर्वलोकवन्दित जगदीश्वर श्रीराम को जन्म दिया। उनके सौंदर्य व तेज को देखकर उनके नेत्र तृप्त नहीं हो रहे थे, राजमहल एवं प्रजा जनों के बीच ख़ुशी छा गई। कैकेयी को भरत एवं सुमित्रा को लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न नाम के पुत्र हुए। चारों राजकुमार एक साथ समान वातावरण में पलने लगे। समय आने पर उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। छोटी अवस्था में ही विश्वामित्र मुनि के आश्रम में उनकी तपस्या में विघ्न डालने वाले राक्षसों को राम एवं लक्ष्मण ने वीरतापूर्ण मार गिराया। फिर तो ऋषियों के यज्ञ निर्विघ्न रूप से पूरे किए जाने लगे.
राम धर्म के मूर्तरूप हैं |भगवान राम की गुरू सेवा, जाति-पाँति का भेदभाव मिटाना, शरणागत की रक्षा, भ्रातृ-प्रेम, मातृ-पितृ भक्ति, एक पत्नी व्रत, पवनसुत हनुमान तथा अंगद कि स्वामी भक्ति, गिद्धराज की कर्तव्यनिष्ठा तथा केवट आदि के चरित्रो की महानता को अपनाना चाहीए। इन्ही विशेषताओं के कारण सदैव से वे जनमानस के अंतरतम में आत्मा के पर्याय के रूप में प्रतिष्टित हैं | रामनवमी के दिन उनका जन्मोत्सव मनाकर सारा भारत अपने आपको सदियों पुराणी परम्परा से जोड़ लेता है . रामनवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना का श्रीगणेश किया ।